मराठीसाठी वेळ काढा

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शनिवार, 12 दिसंबर 2020

गणित पाठ २ दशतः शतं पर्यंतम्

 

संस्कृत पाठशाला कक्षा

गणित पाठ

दशतः शतं पर्यंतम्


१० दश

२० विंशतिः

३० त्रिंशत्

४० चत्वारिंशत्

५० पंचाशत्

६० षष्टिः

७० सप्ततिः

८० अशीतिः

९० नवतिः

१०० शतम्











गणित पाठ १ सरलानि अंकानि संख्यागणना एकतः विंशतिः पर्यंतम्

 

संस्कृत पाठशाला कक्षा

गणित पाठ सरलानि अंकानि

संख्यागणना एकतः विंशतिः पर्यंतम्

१ – एकम् २ – द्वे - त्रीणि ४ – चत्वारि - पञ्च

- षट् - सप्त - अष्ट - नव १० - दश

११ - एकादश १२ - द्वादश १३ - त्रयोदश १४ – चतुर्दश १५ – पंचदश

१६ – षोडश १७ – सप्तदश १८ – अष्टादश १९ – एकोनविंशतिः २० – विंशतिः

(अंकगणनाके लिये नपुंसक लिंगका प्रयोग होता है)

(१९ के लिये नवदश या ऊनविंशति का प्रयोग भी कर सकते हैं।)

बुधवार, 9 दिसंबर 2020

आगतम् स्वागतम्अत्र आगम्यताम्

 

आगतम् स्वागतम्

आगतम् स्वागतम् आगच्छतु भवान् ।।

स्वीकरोतु पुष्पाणि हृष्यतु भवान् ।।

आगतम् स्वागतम् आगच्छतु भवान् ।।

मम गिटारं श्रृणोतु हृष्यतु भवान् ।।

आगतम् स्वागतम् आगच्छतु भवान् ।।

मम पुस्तकं पश्यतु हृष्यतु भवान् ।।

आगतम् स्वागतम् आगच्छतु भवान् ।।

मम प्रांगणे क्रीडतु हृष्यतु भवान् ।।

आगतम् स्वागतम् आगच्छतु भवान् ।।

केकमेतत् खादतु हृष्यतु भवान् ।।

अत्र आगम्यताम्

अत्र आगम्यताम् शीघ्रं आगम्यताम् ।।

तत्र उपविश्यताम् झटिति उपविश्यताम् ।।

पुष्पं मे दीयताम् निस्संकोचं गृह्यताम् ।।

पुस्तकं पठ्यताम् नाटकं दृश्यताम् ।।

निर्भयं उच्यताम् विवादः त्यज्यताम् ।।

घण्टिकां वाद्यताम् प्रार्थनां गीयताम् ।।

-- (taken from some book printed from Varanasi)

टिंगुलाला किं किं करोति

 

टिंगुलाला किं किं करोति

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला टिंगुलाला गानं गायति ।।

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला टिंगुलाला दुग्धं पिबति।।

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला टिंगुलाला शयनं करोति।।

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला कर्दलीफलं खादति।।

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला कंदुकेन सह क्रीडति।।

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला टिंगुलाला वादनं करोति।।

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला टिंगुलाला मधुरं वदति।।

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला अद्य चंद्रमां पश्यति।।

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला टिंगुलाला स्नानं करोति।।

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला टिंगुलाला उपविशति।।

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला टिंगुलाला रोटिं खादति।।

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला रोदनं करोति।।

टिंगुलाला टिंगुलाला किं करोति टिंगुलाला टिंगुलाला हा हा हसति।।

-लीना मेहेंदले

नटखट ढब्बूजीके गीत ५ हिंदी संस्कृत

 

नटखट ढब्बूजीके गीत

) ओ ढब्बूजी, तुम क्या खाते जी

मैं तो खाऊँगा, चना जोर गरम

और कचोरी और आईस्क्रीम

ए ढब्बूजी, तुम क्या खाते जी

मैं तो खाऊँगा, लड्डू और बर्फी

या फिर खाऊँगा ठंडी ठंडी कुल्फी

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भो ढब्बूजी त्वम् किं खासि

खादिष्याम्यहम् चनाजोरगरमम्

एवं कचोरीम् वा आईस्क्रीमम्

भो ढब्बूजी त्वम् किं खासि

खादिष्याम्यहम् लड्डून् वा बर्फीम्

अथवा प्रियं मे शीतां शीतां कुल्फीम् ।।

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) ओ ढब्बूजी, तुम क्या पढते जी

मैं तो पढूँगा कखगघङ

अआइई और क्षत्रज्ञ

ए ढब्बूजी, तुम क्या पढते जी

मैं तो पढूँगा एक दो तीन चार

पाँच छः सात आठ नौ और दस

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भो ढब्बूजी त्वम् किं सि

पठिष्यामि अक्षरान् कखग

अआइई एवं क्षत्रज्ञ

भो ढब्बूजी त्वम् किं सि

पठिष्यामि एकं द्वे त्रीणि चत्वारि

पंच षट् सप्त अष्ट नव च दश ।।

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) ओ ढब्बूजी, तुम क्या देखते जी

मैं तो देखूँगा रंगबिरंगे फूल

गाते पंछी और हरी हरी घास

ओ ढब्बूजी, तुम क्या देखते जी

मैं तो देखूँगा उजला उजला चाँद

काले काले बादल नीला आकाश

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भो ढब्बूजी त्वम् किं पश्यसि

बहूनि पश्यामि पुष्पाणि अहं

गायन्तान् खगान् हरितम् ग्रासम्

भो ढब्बूजी त्वम् किं पश्यसि

पश्यामि अहं चंद्रमाम् शुभ्रम्

श्यामवर्णान् मेघान् नीलमाकाशम् ।।

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) ओ ढब्बूजी, तुम क्या करते जी

मैं तो कूदूँगा धप्पधपाधप

खीर खाऊँगा गपगपागप

ओ ढब्बूजी, तुम क्या करते जी

मैं तो भागूँगा भैया से आगे

दादीजी मेरे पीछे पीछे भागे

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भो ढब्बूजी त्वम् किं करिष्यसि

कूर्दिष्याम्यहम् धप्पधपाधप

खीरं खादिष्यामि गपगपाग

भो ढब्बूजी त्वम् किं करिष्यसि

भ्रातृभ्यः अग्रे धाविष्याम्यहम्

पितामही धाविष्यति पृष्ठतः मह्यम् ।।

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) ओ ढब्बूजी, तुम कहाँ बैठते जी

मैं तो बैठूँगा दादीजी की गोदमें

झूला झूलूँगा झूलनकुर्सीमें ।।

ओ ढब्बूजी, तुम कहाँ बैठते जी

मैं तो बैठूँगा दादीजीकी पीठपर

दादी बोलेगी ये है बोरी भर शक्कर

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भो ढब्बूजी कुत्र उपविश्यसि

मातामह्याः अंके उपविश्याम्यहम्

हिंदोला हिंदोला दोलयाम्यहम्

भो ढब्बूजी कुत्र उपविश्यसि

मातामह्याः पृष्ठे उपविश्याम्यहम्

सा कथयिष्यति शर्करा इदम् ।।